पहली संतान
लगभग बीस साल पहले मेरे नाना हार्ट अटैक की वजह से चल बसे थे , सारा खानदान सोग मना रहा था , जिसमें मेरी सबसे छोटी मौसी कुछ ज़्यादा ही दुखी थी। होगी ही , रोते-रोते वह मेरी छोटी बुआ से बार-बार यही दोहराए जा रही थी- “कभी छोटे बन कर पैदा नहीं होना चाहिए।” उस समय जो कि मैं बहुत छोटी थी , समझ नहीं सकी थी , आखिर मौसी ऐसा क्यों कह रही है जबकि सुन यह रखा था कि जो घर में सबसे छोटा होता है , उसे सबसे ज़्यादा प्यार मिलता है। अमूमन मिलता भी है क्योंकि परिवार में उससे छोटा कोई होता भी नहीं तो बाकी सदस्य उसे अपनी ज़िम्मेदारी समझते हैं और वह कितना ही बड़ा क्यों न हो जाए हमेशा छोटा ही रहेगा। लग-भग हर ज़िम्मेदारी से बचता-बचाता। आज-कल आबादी पर नियंत्रण करने के लिए वैसे “ बच्चे दो ही अच्छे ”, “हम दो हमारे दो” जैसे स्लोगन पढती हूँ तो मन में ऐसे खयाल आने लगते हैं कि पिछ्ले ज़माने में लोग इतने बच्चे किस हिम्मत से पैदा कर लेते हैं ? शायद इसीलिए हमारे यहाँ गरीबी ज़्यादा है वगैरा-वगैरा। लेकिन एक दिन अचानक मेरे अब्बा की तबीयत खराब हुई तब मैं घर में नहीं थी , भाई काम पर गया था , बहन अपने घर म...